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माथे या सिर पर उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ हडà¥à¤¡à¥€ या गांठहै ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ का संकेत, डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जानें इस बीमारी का कारण और इलाज
बहà¥à¤¤ से लोगों को आपने चेहरे, खोपड़ी या गरà¥à¤¦à¤¨ पर à¤à¤• गांठबाहर निकलती हà¥à¤ˆ देखी होगी। à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ गांठजिसमें दरà¥à¤¦ नहीं होता, लेकिन चेहर के ऊपर उà¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† à¤à¤¾à¤— दिखता है। इस गांठको ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ कहते हैं। यह जरूरी नहीं है कि हर गांठओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हो। पीजीआई रोहतक में नà¥à¤¯à¥‚रो सरà¥à¤œà¤¨ डॉ. ईशà¥à¤µà¤° ने कहा कि ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हडà¥à¤¡à¥€ का टà¥à¤¯à¥‚मर होता है। यह शरीर के अलग-अलग हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में निकलता है। यह ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ नॉन कैंसरस होता है। इसे छूने पर आप तà¥à¤µà¤šà¤¾ के अंदर की गांठको महसूस कर सकते हैं। लेकिन छूने पर कोई दरà¥à¤¦ नहीं होता। डॉकà¥à¤Ÿà¤° का कहना है कि इसमें दरà¥à¤¦ तब तक महसूस नहीं होता जब कि यह नाक के नेजल साइनसिस में होकर ये बà¥à¤°à¥‡à¤¨ में नहीं चला जाता है। तो उस दौरान ये नसों को दबा सकता है तब इसका ऑपरेशन होता है। आज इस लेख के माधà¥à¤¯à¤® से हम जानेंगे कि यह ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है, इसके कारण और बचाव कà¥à¤¯à¤¾ हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ है ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾
ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हडà¥à¤¡à¥€ का टà¥à¤¯à¥‚मर होता है। इसे कैंसर नहीं कह सकते। खोपड़ी में अकà¥à¤¸à¤° ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हो जाते हैं। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ खोपड़ी पर होने के अलावा नाक के साइनस में à¤à¥€ हो जाते हैं। ये à¤à¤• सखà¥à¤¤ सी चीज हो जाती है। कई बार इसे छूने पर अंदर का टà¥à¤¯à¥‚मर हिलता हà¥à¤† à¤à¥€ महसूस होता है। यह à¤à¤• तरह की छोटी हडà¥à¤¡à¥€ होती है। हाथ से छूने पर अंदर का टà¥à¤¯à¥‚मर हिलता हà¥à¤† महसूस होता है लेकिन इसे हाथों से हटाया नहीं जा सकता। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ धीरे-धीरे होती है और अकà¥à¤¸à¤° 20 से 40 उमà¥à¤° के यà¥à¤µà¤¾à¤“ं में दिखता है। और कई बार छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥€ यह दिखता है। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की केवल फिजिकल पà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‡à¤‚स ही दिखती है लेकिन इसमें किसी तरह का कोई दरà¥à¤¦ या पेशेंट को कोई असहजता महसूस नहीं होती। यह अकà¥à¤¸à¤° जेनेटिक हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ या किसी टà¥à¤°à¥‰à¤®à¤¾ की वजह से होता है।
शरीर के किन हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में होता है ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾
1.साइनस के पास- ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ साइनस में à¤à¥€ हो सकता है। जिसमें यह साइनस इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का कारण बनता है।
2.आंख के पास- आंख में जब ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हो जाता है तब उस केस में आंख बाहर à¤à¥€ आ जाती है। इसे पà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ कहा जाता है।
3.माथे पर ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾- माथे पर होने वाला ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ सिर दरà¥à¤¦ देता है।
4.जबड़े पर- जबड़े पर होने वाले ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ में मà¥à¤‚ह चलाने पर मà¥à¤‚ह और चेहरे पर दरà¥à¤¦ होता है।
5.कान- जब कान में ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हो जाता है तब वह कान की सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर असर डाल सकता है। इसे इलाज के माधà¥à¤¯à¤® से ही ठीक किया जा सकता है।
6.लंबी हडà¥à¤¡à¥€ में ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾- शरीर की लंबी हडà¥à¤¡à¥€ में होने वाले इस ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ को ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤¡à¥à¤¸ कहा जाता है। यह पिंडली की हडà¥à¤¡à¥€ और जांघ की हडà¥à¤¡à¥€ में दिखते हैं।
ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ का कारण
अà¤à¥€ तक डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है इसके कारणों को नहीं पहचान पाà¤à¤‚। डॉकà¥à¤Ÿà¤° ईशà¥à¤µà¤° का कहना है कि शरीर में जैसे बाकी टà¥à¤¯à¥‚मर हो जाते हैं वैसे ही यह à¤à¥€ हो जाता है। इसके पीछे के सही कारणों का अà¤à¥€ तक पता नहीं चल पाया है। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ धीरे-धीरे होती है। जिससे यह सीधे दिखाई नहीं देता। लेकिन कई बार किसी चोट की वजह से à¤à¥€ ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हो जाता है।
ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ का इलाज
डॉकà¥à¤Ÿà¤° ईशà¥à¤µà¤° का कहना है कि जब हमारे पास बà¥à¤°à¥‡à¤¨ और सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨ में होने वाले ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ को लेकर मरीज आते हैं। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ à¤à¤• बाहरी गांठबनकर बाहर दिखता है। जिसे सरà¥à¤œà¤°à¥€ करके ठीक किया जा सकता है। कई बार नाक के नीचे जो पैरा नेजल साइनेस के माधà¥à¤¯à¤® से जब ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ दिमाग में चला जाता है तब ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। कई बार ये आंख की नस या दिमाग की नस को दबा देता है। उस दौरान ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। अगर यह आंख में घà¥à¤¸ जाता है तो आंख की मूवमेंट को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। आà¤à¤– बाहर निकल आती है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ ऑपरेशन करना पड़ता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° ईशà¥à¤µà¤° ने बताया कि जब उनके पास पेशेंट आता है तब वे पहले खोपड़ी का à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥‡ कराते हैं। फिर सिटी सà¥à¤•ैन कराते हैं। अगर ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ किसी नस को दबा रहा होता है तो à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ करा लेते हैं। बाकी सिटी सà¥à¤•ैन से डायगà¥à¤¨à¥Œà¤¸ हो जाता है। नाक के ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ को दूरबीन से निकाल सकते हैं।
ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ सरà¥à¤œà¤°à¥€ के फायदे
ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• नहीं होता। इसलिठलोग इसका इलाज नहीं कराते। लेकिन यह अगर चेहरे पर हो जाठतो चेहरे की खूबसूरती पर धबà¥à¤¬à¤¾ लगा देता है। लेकिन डॉ. ईशà¥à¤µà¤° का कहना है कि अगर ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤¯à¤®à¤¾ दिमाग या आंख की किसी नस को दबाता है तो यह पेशेंट को दिकà¥à¤•त करता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दरà¥à¤¦ होता है। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ को सरà¥à¤œà¤°à¥€ के माधà¥à¤¯à¤® से ठीक किया जा सकता है। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ सरà¥à¤œà¤°à¥€ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ कराना चाहिेठइसके पीछे कारण यह हैं।
1. जिन लोगों को खोपड़ी में ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ हो जाता है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बाल कंघी करने में दिकà¥à¤•त होती है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के कराने से इस दिकà¥à¤•त से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिल जाता है। खोपड़ी का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिकà¥à¤•त करता है।
2. सरà¥à¤œà¤°à¥€ होने के बाद ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की असहजता से निजात मिलती है। अगर यह चेहरे पर है या कान के पीछे या आंख पर है तो दिखने में तो बà¥à¤°à¤¾ लगता ही साथ ही बार-बार आप इस ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की वजह से लोगों की नजरों में आते हैं। जिसे लेकर लोगों के सवालों का जवाब देना पड़ता है।लेकिन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद आप इससे होने वाली परेशानियों से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पा सकते हैं।
3. ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के पेशेंट खà¥à¤¦ को नॉरà¥à¤®à¤² महसूस करता है। अपने डिसकमà¥à¤«à¤°à¥à¤Ÿ से बाहर निकलता है।
इलाज के बाद कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
1. इलाज के बाद पेशेंट को जिस जगह ऑपरेशन किया गया है वहां सà¥à¤¨à¥à¤¨à¤ªà¤¨, सूजन, निशान पड़ना, पीलापन होना आदि परेशानियां à¤à¥‡à¤²à¤¨à¥€ पड़ती हैं।
2. इलाज के दौरान जो सà¥à¤¨à¥à¤¨ करने वाली दवा दी जाती है वह कà¥à¤› घंटों बाद बंद हो जाती है। इलाज के बाद कà¥à¤› असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ होने पर टà¥à¤¯à¤²à¥‡à¤¨à¤² और मोटà¥à¤°à¤¿à¤¨ दवाओं से ठीक किया जाता है।
3. ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद सूजन होना आम है, लेकिन इसे कूल कंपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤¸ की मदद से कम किया जाता है। तो वहीं, इलाज वाली जगह को à¤à¥€ ठंडक पहà¥à¤‚चाई जाती है।
4. सरà¥à¤œà¤°à¥€ होने के बाद उस à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग की जाती है जिसे 24 घंटे बाद निकाला जाता है।
5. पेशेंट को सरà¥à¤œà¤°à¥€ के 24 घंटे बाद ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° नहाने की सलाह देते हैं।
6. इलाज के दौरान जो चीरा लगाया जाता है वह 7 से 10 दिन में निकाल दिया जाता है।
7. इलाज के à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ बाद आप काम पर वापसी कर सकते हैं। लेकिन यह निरà¥à¤à¤° करता है कि किसी पेशेंट की शारीरिक कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कैसी है और कितने समय बाद कोई खà¥à¤¦ को ठीक फील करता है।
ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ अकà¥à¤¸à¤° नाक, कान, गले, चेहरे और खोपड़ी पर होने वाला टà¥à¤¯à¤®à¤° है। यह नॉन कैंसरस है। इसमें शरीर के ऊपर à¤à¤• उà¤à¤¾à¤° दिखता है। जो कई बार चेहरे की खूबसूरती को बिगाड़ देता है। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ तब तक खतरनाक नहीं होता जब तक कि यह जहां निकला है उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की नसों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ न करे। नसों को दबाने पर गंà¤à¥€à¤° परिणाम पेशेंट को à¤à¥‡à¤²à¤¨à¥‡ पड़ते हैं। ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¤¾ का इलाज संà¤à¤µ है।
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